आज का शब्द: विस्मरण और सोम ठाकुर की कविता- तुम रहे हो द्वीप जैसे काव्य डेस्क
आकर मुझे तोड़ जाएगा बिखराकर मेरे ख्वाबों को
तू हँसती रही गैरों के साथ,और हम तुझे याद करके रोते रहे रातों रात।
तू जब से मिला है, हर दर्द चला गया,तेरे प्यार में ही मेरा सुकून छुपा है। ❤️
ज़िन्दगी से जो भी मिले सीने से लगा लो ❤️ गम को सिक्के की तरह उछाला नहीं करते…..
❝न ढूंढ मेरा किरदार दुनिया की भीड़ में,
तेरी बेवफ़ाई का अफ़सोस तो रहेगा उम्र भर,मगर अब तुझसे कोई शिकायत भी नहीं।
बस बातें अपने जैसे करते हैबांकी पराये सब है।
अब तो खुद से भी नफरत सी हो गई है,तेरे जाने के बाद जीने की चाहत ही खो गई है। ️
“मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में।
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं।
हमारा Trending Shayari अंदाज़ ही कुछ ऐसा है दोस्तों,जो देखता है, वही बोल उठता है — “राजा तो यही है!”
“अजीब दस्तूर है जमाने का, अच्छी यादें पेनड्राइव में और बुरी यादें दिल में रखते हैं लोग।”
....।। अजीब होता है ज़िन्दगी का सफर भी पसंद आये कोई और मगर किस्मत में कोई और ही होता है।।